चीन, नए कोरोना के मरीजों की खबर जैसे-जैसे दुनिया में फैल रही है. वैसे-वैसे कोरोना से पीड़ित मुल्कों की सांसें और ज्यादा फूलने लगी हैं. एक तो पहले ही दुनिया के ज्यादातर देशों के लिए कोरोना से निपटना मुश्किल हो रहा है. और अब अगर उससे ठीक हुए मरीजों में भी कोरोना ने री-एंट्री कर दी. तो फिर दुनिया के लिए हालात संभालना मुश्किल हो जाएगा. हालांकि गनीमत ये है कि दुनिया के पास इस चैलेंज से निपटने और उसकी तैयारी के लिए अभी वक्त है.

अब सवाल ये है कि आखिर इस नए कोरोना की वापसी कैसे हुई? जबकि पुराना कोरोना अब भी मौजूद है. उससे भी बड़ा सवाल ये कि इस नए कोरोना की शुरुआत भी चीन के उसी हुबेई प्रांत से ही क्यों हुई, जहां से कोरोना का जन्म हुआ था? दरअसल, हुआ ये कि लॉकडाउने के बाद चीन के हुबेई में कोरोना का ग्राफ बहुत तेजी से नीचे गिरा.

मार्च के महीने में तो वहां कोरोना के सिर्फ इक्के-दुक्के मामले ही सामने आए. इसलिए चीन को लगा कि हुबेई से अब ये बीमारी खत्म हो चुकी है. और चूंकि कोई नए मामले सामने नहीं आ रहे थे. लिहाजा चीनी सरकार ने हुबेई से लॉकडाउन को हटाना सही समझा. ये इसलिए था ताकि वहां ठप पड़ी उनकी इकॉनोमी दोबारा से चल सके.

25 मार्च को चीन की सरकार ने हुबेई सूबे में सिर्फ वुहान को छोड़कर बाकी सब जगहों से लॉकडाउन हटा दिया. इधर, लॉकडाउन हटा और उधर, महज 3 से 4 दिन के बाद से ही कोरोना के मरीजों के नए मामले सामने आने शुरू हो गए. किसी को समझ नहीं आया कि ये क्या हो रहा है. अचानक ये मामले फिर से कैसे और क्यों सामने आने लगे. यकीनन ये चीजें हैरान करने वाली थीं. क्योंकि चीन के हुबेई सूबे में कोरोना का ग्राफ बता रहा था कि 22 जनवरी से यहां कोरोना के मामले शुरु हुए और लॉकडाउन की वजह से एक महीने में ही ये मामले तकरीबन खत्म हो गए थे.
 
इसको और बारीकी से समझें तो 20 जनवरी को ही चीन ने माना था कि उसके मुल्क में कोरोना ने हमला कर दिया है. धीरे-धीरे कोरोना के मामलों का ये ग्राफ ऊपर बढ़ता गया. और 13 फरवरी को ये अपनी पीक पर पहुंचा. यानी इन 20 दिनों में कोरोना के मामले हुबेई प्रांत में बहुत तेजी से आगे बढ़े. खासकर वुहान में. मगर लॉकडाउन की वजह से ये ग्राफ इसके बाद लगातार नीचे जाता गया और कोरोना पीड़ितों के चार्ट का कर्व एकदम फ्लैट होने लगा. फिर 31 मार्च आते-आते तो वुहान समेत पूरे चीन में कोरोना के मामले तकरीबन खत्म हो चुके थे. या कहें जो मामले सामने आ भी रहे थे वो फरवरी के मध्य में आए मामलों के सामने कुछ भी नहीं थे.

फिर लॉकडाउन हटाते ही सब कुछ बदल कैसे गया. क्यों कोरोना के नए मामले सामने आने लगे. इसे समझने के लिए आपको चीन में इसके आगे की कोरोना की क्रोनोलॉजी को समझना होगा. दरअसल हुआ ये कि 23 जनवरी को चीन ने हुबेई में लॉकडाउन की घोषणा की और दो महीने बाद यानी 20-24 मार्च तक उसे बरकरार रखा. इस दौरान जब हुबेई में कोरोना के कोई नए केस सामने आए ही नहीं तो 25 मार्च को चीनी सरकार ने हुबेई का लॉकडाउन हटा लिया. हालांकि कोरोना के एपिसेंटर वुहान में लॉकडाउन अभी भी जारी है.

लेकिन हुबेई में लॉकडाउन हटाते ही फैक्ट्रीज खोल दी गईं. सिनेमाघरों को खोल दिया गया. पब्लिक ट्रांसपोर्ट को दोबारा शुरु कर दिया गया. लोगों पर हुबेई से बाहर जाने की पाबंदी हटा ली गई. यहां तक की स्कूल भी खोल दिए गए. प्रतिबंधों को हटाने के बाद भी हालांकि हुबेई में बस मेट्रो और पब्लिक प्लेसेस को सैनिटाइज करने का काम रोका नहीं गया.

हुबेई से लॉकडाउन हटाए जाने के बाद कई वीडियो सामने आए हैं. जिसमें साफ नजर आ रहा है कि कई जगहों पर ऐसे साइन बोर्ड लगे हैं. जिस पर लिखा है एपिडेमिक फ्री रेसिडेंशियल एरिया. यानी ऐसे रिहायशी इलाके जहां अब कोरोना का कोई प्रभाव नहीं है. ग्रोसरी यानी परचून की दुकान पहले की तरह खोल दी गईं. यहां तक की जो कोरियर कंपनी थी वो भी दोबारा से चलने लगी हैं.