भोपाल । राजधानी के सबसे बडे सरकारी अस्पताल हमीदिया में डायलिसिस की पांच और मशीनें शुरु हो गई है। इसका फायदा यह होगा कि रोजाना अब 10 और मरीजों की डायलिसिस की जा सकेगी।यहां अपना इलाज कराने आने वाले गरीब मरीजों को डायलिसिस के लिए निजी अस्पताल नहीं जाना होगा। अभी सात मशीनों से हर दिन 17-18 मरीजों की डायलिसिस हो पा रही थी। डायलिसिस के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाने की वजह से 5 मशीनें डेढ़ साल पहले आने के बाद भी उपयोग नहीं हो पा रही थीं। अब यहां पानी की व्यवस्था के लिए 1000-1000 लीटर क्षमता वाले दो आरओ प्लांट लगाए गए हैं। एक मरीज की डायलिसिस में 250 से 300 लीटर तक पानी लगता है। सभी 12 मशीनें चलाने के लिए हर दिन कम से कम 2 हजार लीटर पानी की जरूरत थी। अभी तक आरओ प्लांट की क्षमता 500 लीटर प्रति 12 घंटे थी। प्लांट उस वक्त लगाया गया था, जब सिर्फ तीन मशीनें थीं। 
    मालूम हो कि अस्पताल प्रबंधन ने मशीनें तो बढ़ा दी, लेकिन पानी के लिए आरओ प्लांट नहीं लगवाया था। जेपी अस्पताल में करीब महीनेभर से खराब तीन डायलिसिस मशीनें सुधर गई हैं। इन मशीनों के ठीक होने से रोजाना 7-8 और मरीजों की डायलिसिस हो सकेगी। पांच मशीन लगातार चल रही हैं। इस तरह यहां अब 8 मशीनों से हर दिन 15-16 मरीजों की डायलिसिस की जा रही है। जेपी और हमीदिया में एक बार डायलिसिस का खर्च करीब 500 रुपए है। यह राशि मरीजों से डायलिसिस के लिए लगने वाले डायलायजर के लिए ली जाती है। निजी अस्पतालों में एक बार की डायलिसिस के 2 हजार रुपए लगते हैं।बता दें कि अस्पताल में कुल 13 मशीनें हैं। इनमें पांच कंडम घोषित की जा चुकी हैं। यह पांच मशीनें सात साल पुरानी हैं। सभी मशीनें चलने पर 25-30 मरीजों की डायलिसिस रोज होती थी।