नई दिल्ली । दाल-चावल भारत का सबसे सादा, सबसे मशहूर और सबसे प्रचलित भोजन है। इसको बनाना भी आसान होता है और पचाना भी। अब इसी दाल-चावल को दुनिया के वैज्ञानिकों ने सबसे अच्छा भोजन माना है। मशहूर ‘नेचर’ पत्रिका में प्रकाशित एक नई रिसर्च रिपोर्ट में पता चला है कि दाल-चावल कई तरह के अनुवांशिक विकारों और बीमारियों से लडऩे में मददगार साबित हो सकता है।  जर्मनी की ल्यूबेक यूनिवर्सिटी में किए गए इस शोध में पता चला है कि सिर्फ डी।एन।ए। में गड़बड़ी होने से अनुवांशिक बीमारियां नहीं होतीं, आहार की भी इसमें अहम भूमिका होती है। आहार ठीक न हो तो वह ऐसी बीमारी पैदा कर सकता है और आहार सही हो तो वह बीमारी पर रोक लगा सकता है। यह शोध 3 वैज्ञानिकों रूस के डॉ अर्तेम वोरोवयेव, इसराईल की डॉ तान्य शेजिन और भारत के डा यास्का गुप्ता ने किया है। 
दाल-चावल खाने के कई फायदे है जैसे दाल में कई ऐसे अमीनो एसिड्स होते हैं जो चावल में नहीं होते। ऐसे में जब आप दाल और चावल साथ खाते हैं तो आपको ये सारे पोषक तत्व मिल जाते हैं। दाल और चावल दोनों में ही फाइबर की भरपूर मात्रा होती है। यह एक सुपाच्य व्यंजन है। फाइबर की मौजूदगी से पाचन क्रिया बेहतर बनती है। अगर आप सफेद चावल की जगह ब्राऊन राइस का इस्तेमाल करते हैं तो ये और भी फायदेमंद है। ब्राऊन राइस में सेलेनियम, मैंगनीज, कॉपर, फॉस्फोरस और मैग्नीशियम जैसे आवश्यक लवण पाए जाते हैं। 
मांसाहारी में प्रोटीन की कमी नहीं हो पाती लेकिन शाकाहारी लोगों के लिए दाल ही प्रोटीन का प्रमुख माध्यम है। इसमें मौजूद फोलेट दिल को सुरक्षित रखने में भी मददगार होता है। माना जाता है कि चावल खाने से वजन बढ़ जाएगा पर ऐसा नहीं है। दाल-चावल खाने से काफी देर तक पेट भरे होने का अहसास होता है, जिससे दिनभर कुछ-कुछ खाने की जरूरत नहीं पड़ती और एक्स्ट्रा कैलोरी जमा नहीं हो पाती।