कवर्धा : छत्तीसगढ़ के आदिवासी, बैगा बहुल कबीरधाम जिला मैकल पर्वत श्रेणी के तलहटी पर बसा हुआ है। पर्वत पहाड़ों से घिरे हुए यह जिला वृष्टिछाया (कम वर्षा वाले) जिले के रूप में राज्य में चिन्हांकित है। औसतन यहां कम बारिश होती है। हांलांकि यहां पिछले वर्ष औसत से अच्छी बारिश हुई थी। जिसकी वजह से कबीरधाम जिले के पांच मध्यम जलाशयों में जल भराव की स्थिति र्प्याप्त है। ऐसी स्थिति जिले के 101 लघु जलाशयों में भी है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के मंशानुसार कबीरधाम जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी से जोड़कर जल संरक्षण, संवर्धन और भूमि जल स्त्रोतों को बढ़ाने के लिए पिछले दो वर्षो में छोटे-छोटे लेकिन अनेक महत्वपूर्ण कार्य हुए है। बरसात के पानी को एकत्र करने तीन हजार से अधिक तालाब निर्माण, तलाब गहरीकरण, कुआं निर्माण, डबरी निर्माण और प्राकृतिक जल स्त्रोंतों को पुर्न जीवत तथा निर्मल पानी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए झिरिया का पक्कीकरण उसे मजबूत किया गया है। छोटे-छोटे जल संवर्धन और भूमिगत जल स्त्रोतों को पुर्नजीवित करने वाले इस काम से कबीरधाम की धरती में नमी बढ़ाने और जल स्त्रोतों को बढ़ोने कारगर साबित होगा।
    छत्तीसगढ़ का आर्थिक विकास का आधार कृषि है। प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए सुराजी गांव योजना के तहत छत्तीसगढ़ के चार चिन्हारी नरवा, गरवा, घुरवा अउ बारी पर अधिक जोर दिया गया। महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत बाड़ी विकास और रोजगार मूलक कार्यो को फोकस किया जा रहा है। 6 करोड़ 48 लाख 75 हजार रूपए की लागत से मनरेगा के तहत  जिले में सिंचाई क्षमता बढ़ाने और सिंचाई योजनाओं के मरम्मत, रख-रखाव के लिए लगभग अलग-अलग 49 काम किए गए। जिले के विभिन्न सिंचाई योजना जो पिछले कई वर्षो पूर्व मरम्मत, रख-रखाव के अभाव में जीर्ण-शीर्ण और क्षतिग्रस्त हो चुके थे। ऐसे काम को मनरेगा योजना से किया जा रहा है वहीं आवश्यकता अनुसार बांध, नहर, प्रणाली में आवश्यक सुधार और  मरम्मत के भी काम यह जा रहे हैं।  इन सभी कामों के पूरा होने से 2 हजार 779 हेक्टेयर में सिंचाई की कमी की पूर्ति होगी। किसानों को समय पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी और सिंचित क्षेत्रों के रकबा में बढोत्तरी भी होगी।
    कबीरधाम जिले के ग्रामीण अंचलों में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार के लिए पिछले वर्षा से व्यापक कार्य कराए जा रहें है। कुंआ, डबरी, झीरिया जैसे परंपरागत जल श्रोतो के कार्यो से एक ओर जहां पेयजल कि व्यवस्था ग्रामीणों के लिए हो रहीं है, तो वहीं दूसरी ओर इन कार्यो से रोजगार के अवसर ग्रामीणें को लगातार मिल रहे है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2018-19 से लगातार ऐसे कार्यो को प्राथमिकता के आधार पर जिले में कराया जा रहा है। ग्रामीणों के बाड़ी अथवा खेत में बनाए गए कुंआ और डबरी से जल संरक्षण तो हो  रहा है ,साथ ही ऐसे कार्यो से आजीविका संवर्धन के नये आयाम ग्रामीणों को मिल रहे है। पिछले दो वर्षो में 301 नए तालाब के निमार्ण किये गये हैं। 1061 पुराने तलाबों का गहरीकरण कर जल क्षमता भराव को बढ़ाने का काम किया गया है। नौ सौ से अधिक डबरी निर्माण के कार्य सभी विकासखण्ड में स्वीकृत किए गए है। इसी तरह 850 से अधिक कुंआ निर्माण के कार्य ज़िले के विभिन्न ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों की मांग पर स्वीकृत किए गए हैं। वनांचल क्षेत्रों में वनवासियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 60 से अधिक झीरिया का जीर्णोद्धार किया गया है। कुंआ एवं झीरिया से पेयजल व्यवस्था ग्रामीण इलाकों में और मजबूत हुई है।